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सहारा इंडिया के मालिक सुब्रत राय की मुश्किलें बढ़ी, लौटाना होगा पूरा पैसा, Sahara India

सहारा इंडिया के मालिक सुब्रत राय की मुश्किलें बढ़ी, लौटाना होगा पूरा पैसा, Sahara India

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सहारा इंडिया (Sahara India)  के मालिक सुब्रत राय की मुश्किलें बढ़ी, लौटाना होगा पूरा पैसा, Sahara India

जैसा की आप लोगों को पता होगा इनकी सहारा इंडिया के मालिक सुब्रत राय पर एक बार फिर से समस्या घिर चुकी है। सहारा इंडिया ने लोगों से ठगी कर खूब पैसा बनाया। और अब जुर्माने की रकम न जमा करने पर इनकी तकलीफ है बढ़ती जा रही है। क्या है पूरा मामला जानेंगे विस्तार से। जानने के लिए पोस्ट को पढ़ते रहें।

बाजार नियामक सेबी के द्वारा OFCD जारी करने में रेगुलेटरी स्टैंडर्ड Regulatory Standard के वायलेशन के मामले में सहारा समूह की एक कंपनी और उसके प्रमुख सुब्रत राय और अन्य अधिकारियों से 6.42 करोड़ों रुपए की वसूली के लिए उनके बैंक और डीमैट खातों को कुर्क करने का आदेश दिया है।

OFCD क्या होता है?

आइए सबसे पहले जानते हैं ओ एफ सी डी क्या होता है? ओईसीडी जनता से पैसे उधार लेने का एक तरीका होता है। और इसके बदले में ब्याज चुकाया जाता है। साथ ही इसके जरिए निवेशकों को कंपनी का हिस्सेदार भी बन सकते हैं।

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ओ एफ सी डी के कुछ नियम भी होते हैं। अगर 50 से कम लोगों को सब्सिडी जारी किया जाता है। तो कंपनी रजिस्ट्रार से परमिशन लेना पड़ता है। वही 50 से ज्यादा लोगों को एमसीडी देने के लिए सेबी से परमिशन लेना पड़ता है।

SEBI ने दीया यह आदेश

सेबी ने सहारा समूह से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। सेबी के द्वारा कुर्की का आदेश सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन जो अब सहारा रियल एस्टेट कॉरपोरेशन के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही सुब्रत राय अशोक राय चौधरी रवि शंकर दुबे और वंदना भार्गव के खिलाफ आदेश आया है।

सेबी ने अपने नोटिस में सभी बैंकों को डिपॉजिटरी और म्यूचुअल फंड यूनिट्स को निकासी की मंजूरी न देने को कहा गया है। हालांकि लोगों ने अपने खाते में पैसा जमा करने की छूट दी है और तो और सेबी ने सभी बैंकों को डिफॉल्टर्स के खाते के अलावा इनके जितने भी लॉकर हैं इनको भी कुर्क करने का आदेश दिया है।

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इतना तामझाम क्यों हो रहा है।

आपको बता दे की साल 2009 में सहारा ग्रुप की कंपनी शेयर मार्केट में जाने की इच्छा जताई। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि शेयर मार्केट में जाने से पहले सेबी से परमिशन लेना पड़ता है। ऐसे में सितंबर 2009 में सहारा प्राइम सिटी की कंपनी ने सेबी को आईपीओ लाने के लिए कहा गया। यानी मार्केट से पैसा उगाही के लिए अपना बायोडाटा भेजा। सेबी ने जब कंपनी का बायोडाटा चेक किया तो इसी दौरान सहारा की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी SIRECL और सहारा हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी SHICL कटघरे में आ गया। सीबी को या लगा कि उन्होंने गलत तरीके से जनता से जमा करवाए हैं।

और यही वजह है कि यही से सहारा की उल्टी गिनती शुरू हो गई। सेबी ने जांच में पाया कि SIRECL और एस एच आई सी एल दो से ढाई करोड़ लोगों से 24000 करोड रुपए इकट्ठे किए ढाई साल तक यह सिलसिला लगातार चलता रहा। सहारा नहीं इसके लिए सेबी से अनुमति भी लेना सही नहीं समझा। और इसी समय से सेबी के तत्कालीन बोर्ड मेंबर डॉक्टर केएम अब्राहिम ने पूरी जांच की जिसमें उन्हें पता चला कि सहारा के कई निवेशक फर्जी हैं और बाकियों का कंपनी से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। आसान भाषा में समझिए कि सहारा ने इन दो कंपनियों के जरिए लोगों से पैसा जमा करवाएं और दुनिया भर में शोर मचाना शुरू कर दिया कि कंपनी इन पैसों से देश के अलग-अलग शहरों में टाउनशिप बनाएगा।

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लेकिन सहारा ने न तो टाउनशिप बनाय। और ना ही कभी पैसे वापस किए हैं। गड़बड़ी सामने आते ही से भी हरकत में आ गया। सेबी ने सहारा के OFCD जारी करने पर रोक लगा दी और लोगों के पैसे 15% ब्याज के साथ। आदेश जारी कर दिया। सहारा इस आदेश पर भड़क गया। और सहारा इंडिया के मालिक सुब्रत राय हाई कोर्ट गए।

और सेबी पर केस कर दिया। जिसके बाद दिसंबर 2010 में कोर्ट ने सेबी के आदेश पर रोक लगा दिया लेकिन 4 महीने के बाद सेबी को सही पाया और फिर सहारा को पेमेंट करने को कहा गया। सहारा इस फैसले पर भी नहीं माना और सुप्रीम कोर्ट चला गया। जिसके बाद सहारा इंडिया को यहां पर भी राहत नहीं मिली। और यहां पर भी सेबी के सही करार दिया गया। इसके बावजूद भी सहारा अपनी गलती नहीं मान रहा है। और इसका मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है।

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By Ankit Kumar
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